Wednesday, August 25, 2010

वाहन योग २



१-चतुर्थ भाव का स्वामी और नवम भाव का स्वामी दोनों एक साथ केंद्र -त्रिकोण का सम्बन्ध बनायें या एक साथ किसी केंद्र 
या त्रिकोण में बैठे तो बड़े वाहन का योग होता है |
२- यदि चन्द्र और चतुर्थ भाव के स्वामी का शुभ  सम्बन्ध ( केंद्र -त्रिकोण का सम्बन्ध ) हो तो 
३- शुक्र और चतुर्थेश का शुभ  सम्बन्ध हो तो 
४ - शुक्र और चन्द्र का केंद्र सम्बन्ध हो तो 
५- चतुर्थ भाव का स्वामी किसी उच्च ग्रह के साथ हो या स्वयं ही उच्च हो या स्वग्रही हो 
६ - कोई भी उच्च ग्रह चतुर्थ भाव में बैठा हो 
इन सभी योगों में बड़े वाहनों का योग होता है |

3 comments:

Anonymous said...

jyotish ki jaankaari deta umda blog...

Meri nayi kavita : Tera saath hi bada pyara hai..(तेरा साथ ही बड़ा प्यारा है ..)

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aashish said...

भूपेंद्र जी प्रणाम
आपका वाहन पर लिखा लेख को पढकर २ -३ कुंडलियों में मिलाया बहुत ही सही निकला मै भी आपके माध्यम से लगता है धीरे-धीरे सीख जाऊंगा|
धन्यवाद
आशीष शर्मा

khan said...

Vahan yog par di gai jankari bahut hi achhi hai mai bahut hi utsuk hun jotish ko janane ke liye,yah jotish vastav me kisi bhi dharm se nahin judi hai kyuonki gyan aur bhasha ka koi bhi mazhab nahin hota
saroj khan